नासिरा शर्मा को पढ़ना दरअसल एक ऐसे समय में प्रवेश करना है, जहाँ इतिहास सिर्फ तारीख़ों में नहीं, मनुष्यों के भीतर घटता है। हिंदी साहित्य में नासिरा शर्मा की उपस्थिति इसलिए अलग और ज़रूरी है कि वे कहानी लिखते हुए भी दरअसल दुनिया को पढ़ रही होती हैं उस दुनिया को, जो सरहदों, धर्मों, भाषाओं और विचारधाराओं के बीच बंटी हुई दिखाई देती है, लेकिन भीतर से एक ही बेचैनी से संचालित होती है। इलाहाबाद: भाषा, स्मृति और साझा संस्कृति उनका जीवन इलाहाबाद की उस सांस्कृतिक मिट्टी से शुरू होता है, जहाँ भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि स्मृति…
Author: Pushpesh Rai
समाज का इतिहास केवल परम्पराओं का इतिहास नहीं होता; वह असहमतियों, बेचैनियों और बदलती हुई संवेदनाओं का भी इतिहास होता है। हर युग में कुछ ऐसे प्रश्न सामने आते हैं जो समाज को अपनी स्थापित मान्यताओं पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य करते हैं। समलैंगिकता का प्रश्न आज हमारे समय का ऐसा ही एक प्रश्न है। यह केवल यौन व्यवहार का प्रश्न नहीं है; यह मनुष्य की स्वतंत्रता, समाज की नैतिकता और संस्कृति की निरंतरता। इन तीनों के बीच चल रही एक जटिल बहस है। हाल के समय में तकनीकी जगत के प्रभावशाली उद्यमी Sam Altman और उनके जीवनसाथी Oliver…
इक्कीसवीं सदी का मनुष्य विचित्र विडंबनाओं से घिरा है। वह अभूतपूर्व संप्रेषण-साधनों के मध्य रहते हुए भी भीतर से पहले से अधिक अकेला है। इसी सामूहिक एकांत की पृष्ठभूमि में दो जीव एक शिशु मकैक पंच और एक तथाकथित निहिलिस्टिक पेंगुइन डिजिटल जगत के प्रतीक बनकर उभरे। एक को उसकी ही माता ने अस्वीकार किया, दूसरे ने मानो अपने एकांत को स्वयं वरण किया। परंतु दोनों की कथाओं में एक गहन सूत्र-साम्यता है अकेलापन, और उस अकेलेपन में अर्थ की खोज। पंच : परित्यक्त शिशु का मौन प्रतिरोध Ichikawa City Zoo में जन्मा पंच (पंच-कुन) एक शिशु मकैक है, जिसे…
हिन्दी सिनेमा के आकाश पर यदि किसी नक्षत्र ने अपनी ज्योति से दर्शकों के अंतःकरण को एक साथ आलोकित और आर्द्र किया है, तो वह मधुबाला हैं। एक ऐसा नाम, जो उच्चरित होते ही केवल सौंदर्य की प्रतिमा नहीं, बल्कि करुणा, अव्यक्त वेदना और अनाम त्याग की गूंज बनकर हृदय में उतरता है। वह मात्र अभिनेत्री नहीं थीं, वह भारतीय जन-मन के स्वप्नलोक की वह छवि थी, जिसमें मुस्कान के अधरों पर अनश्वर विषाद का कंपन निरंतर थिरकता रहा। मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी से मधुबाला बनने की यात्रा, दरअसल एक बालिका के कंधों पर समय की निर्दय व्यवस्था का बोझ…
कभी-कभी लगता है कि देश लोकतंत्र नहीं, एक डरपोक आत्मा की आत्मकथा में तब्दील हो चुका है। सत्ता की गद्दी पर बैठा व्यक्ति जनता से नहीं, सवालों से डरता है। वह प्रधानमंत्री कम, एक टेलीप्रॉम्प्टर-योगी ज्यादा लगता है जो तब तक बोलेगा जब तक सामने भीड़ हो, कैमरा चमक रहा हो, और कोई असुविधाजनक सवाल हवा में न मंडरा रहा हो। लेकिन जैसे ही देश में कोई संकट आता है तो ऑक्सीजन की कमी हो या लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ, अर्थव्यवस्था की टांग टूटे या किसानों की हड्डियाँ वैसे ही ये “56 इंच” सिकुड़कर 5.6 इंच रह जाता…
भूमिका ईरान, जिसे प्राचीन काल में ‘फ़ारस’ (Persia) के नाम से जाना जाता था, पश्चिमी एशिया का एक प्रमुख राष्ट्र है। इसकी ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्ता इसे मध्य-पूर्व (Middle East) की राजनीति का एक केंद्रीय स्तंभ बनाती है। फारस साम्राज्य से लेकर आधुनिक इस्लामी गणराज्य तक की यात्रा में ईरान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं—आंतरिक सुधारों से लेकर बाहरी संघर्षों तक। इस ब्लॉग में हम न केवल ईरान के नाम-परिवर्तन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझेंगे, बल्कि समकालीन समय में खाड़ी देशों (Gulf Countries) के साथ इसके जटिल रिश्तों पर भी गहराई से दृष्टिपात करेंगे। ईरान या फारस: नाम…
हम कहाँ जा रहे हैं? हम किसे देवत्व प्रदान कर रहे हैं? हम किसकी आराधना में स्वयं को विस्मृत कर रहे हैं? एक खिलाड़ी अथवा एक दल, जब अपने समकक्षों के मध्य प्रतिस्पर्धा करता है, तो वह न केवल एक खेल खेलता है, वरन् पूरे राष्ट्र को अनेक खंडों में विभक्त कर देता है। बुधवार को जो कुछ घटित हुआ, उसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी। भारतीय समाज में किसी भी घटना के पश्चात दोषारोपण और राजनैतिक रेखाचित्र खींचना एक स्थापित प्रवृत्ति बन चुकी है। परंतु इस समस्त कोलाहल में यदि कोई पराजित हुआ है, तो वह है…
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को लेकर चल रही सुनवाई ने देशभर में राजनीतिक और कानूनी हलचल मचा दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को केंद्र से पूछा कि क्या वह हिंदू धार्मिक न्यास बोर्डों में गैर-हिंदुओं और मुसलमानों को सदस्य बनाने के लिए कानून बनाएगी। साथ ही, कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि “आप अतीत को फिर से नहीं लिख सकते।” इससे साफ है कि कोर्ट इस कानून के कुछ प्रावधानों पर पुनर्विचार करने के पक्ष में है। वक्फ कानून के विवादास्पद प्रावधान नए वक्फ कानून के तीन…
भारत की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में मनी लॉन्ड्रिंग का चार्जशीट दायर किया। इस केस में देश के प्रमुख राजनीतिक परिवार के खिलाफ इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। चार्जशीट धनशोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act – PMLA) की धारा 3, 44, 45 और 70 के तहत दायर की गई है, जिसमें कंपनी के अधिकारियों और पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की…
कुमार मंगलम बिड़ला का नाम आज भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बिज़नेस जगत में भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। आदित्य बिड़ला समूह के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने न केवल पारंपरिक व्यवसायों को मजबूत किया है, बल्कि उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों (B2C) में भी समूह की एक मज़बूत पहचान बनाई है। आज आदित्य बिड़ला समूह $65 बिलियन की कंपनी है, जिसकी उपस्थिति 41 देशों में है और जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में शीर्ष स्थानों पर काबिज है। WHAT HE DID RIGHT: सफलता की कुंजी कुमार मंगलम बिड़ला की नेतृत्व शैली और रणनीतिक सोच ने उन्हें एक असाधारण कारोबारी…
