Author: Pushpesh Rai

एक विचारशील लेखक, जो समाज की नब्ज को समझता है और उसी के आधार पर शब्दों को पंख देता है। लिखता है वो, केवल किताबों तक ही नहीं, बल्कि इंसानों की कहानियों, उनकी संघर्षों और उनकी उम्मीदों को भी। पढ़ना उसका जुनून है, क्योंकि उसे सिर्फ शब्दों का संसार ही नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगियों का हर पहलू भी समझने की इच्छा है।

नई दिल्ली: छात्र आंदोलन से जुड़े Cockroach Janta Party (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार विवाद उनके दिल्ली स्थित किराए के घर और आंदोलन की फंडिंग को लेकर उठे सवालों को लेकर है। सोशल मीडिया पर उनके घर का पता और किराए से जुड़ी जानकारी वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। क्या है पूरा मामला? हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि सौरव दास जिस घर में रहते हैं, उसका किराया और आंदोलन के खर्च का स्रोत सवालों के घेरे में…

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कुछ लेखक अपनी किताबों से सिर्फ साहित्य नहीं रचते, बल्कि समाज और सत्ता से सवाल भी करते हैं। ऐसे ही नामों में एक हैं तस्लीमा नसरीन। एक डॉक्टर, कवयित्री, उपन्यासकार और स्तंभकार, जिनकी लेखनी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान भी दिलाई और जान का खतरा भी। उनकी किताबें लाखों लोगों ने पढ़ीं, लेकिन कई देशों में उन पर प्रतिबंध भी लगा। उनके खिलाफ फतवे जारी हुए, जान से मारने की धमकियां मिलीं और आखिरकार उन्हें अपना देश छोड़कर निर्वासन का जीवन जीना पड़ा। कौन हैं तस्लीमा नसरीन? तस्लीमा नसरीन का जन्म 25 अगस्त 1962 को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के…

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“आलोचना का काम लेखक की प्रशंसा करना नहीं, बल्कि साहित्य के भीतर छिपे सत्य को सामने लाना है।” यह सिर्फ एक वाक्य नहीं था, बल्कि नामवर सिंह के पूरे जीवन का दर्शन था। हिंदी साहित्य में अगर प्रेमचंद कहानी के शिखर हैं, महादेवी वर्मा संवेदना की आवाज़ हैं और रामधारी सिंह दिनकर ओज के कवि हैं, तो आलोचना की दुनिया में जिस नाम ने सबसे गहरी छाप छोड़ी, वह था नामवर सिंह। 28 जुलाई 1926… उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के जीयनपुर गांव में एक बच्चे का जन्म हुआ। किसी ने नहीं सोचा था कि यही बच्चा आगे चलकर हिंदी…

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मनुष्य के जीवन में कुछ अवस्थाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें केवल जिया जा सकता है, परिभाषित नहीं। प्रेम उनमें से एक है। और जब वही प्रेम एक ऐसे व्यक्ति के जीवन में उतरता है जो समय, उत्तरदायित्वों और संसारगत व्यग्रताओं से घिरा हो, तब वह एक साधारण भाव नहीं रह जाता; वह धीरे-धीरे उसके अस्तित्व का गुप्त व्याकरण बन जाता है। हमारे समय का मनुष्य विचित्र है। उसके पास संवाद के असंख्य माध्यम हैं, पर संवाद का अवकाश नहीं; उसके पास यात्राएँ हैं, पर ठहराव नहीं; उसके पास परिचितों की भीड़ है, पर आत्मीयता का एकांत नहीं। वह दिन भर…

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नासिरा शर्मा को पढ़ना दरअसल एक ऐसे समय में प्रवेश करना है, जहाँ इतिहास सिर्फ तारीख़ों में नहीं, मनुष्यों के भीतर घटता है। हिंदी साहित्य में नासिरा शर्मा की उपस्थिति इसलिए अलग और ज़रूरी है कि वे कहानी लिखते हुए भी दरअसल दुनिया को पढ़ रही होती हैं उस दुनिया को, जो सरहदों, धर्मों, भाषाओं और विचारधाराओं के बीच बंटी हुई दिखाई देती है, लेकिन भीतर से एक ही बेचैनी से संचालित होती है। इलाहाबाद: भाषा, स्मृति और साझा संस्कृति उनका जीवन इलाहाबाद की उस सांस्कृतिक मिट्टी से शुरू होता है, जहाँ भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि स्मृति…

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समाज का इतिहास केवल परम्पराओं का इतिहास नहीं होता; वह असहमतियों, बेचैनियों और बदलती हुई संवेदनाओं का भी इतिहास होता है। हर युग में कुछ ऐसे प्रश्न सामने आते हैं जो समाज को अपनी स्थापित मान्यताओं पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य करते हैं। समलैंगिकता का प्रश्न आज हमारे समय का ऐसा ही एक प्रश्न है। यह केवल यौन व्यवहार का प्रश्न नहीं है; यह मनुष्य की स्वतंत्रता, समाज की नैतिकता और संस्कृति की निरंतरता। इन तीनों के बीच चल रही एक जटिल बहस है। हाल के समय में तकनीकी जगत के प्रभावशाली उद्यमी Sam Altman और उनके जीवनसाथी Oliver…

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इक्कीसवीं सदी का मनुष्य विचित्र विडंबनाओं से घिरा है। वह अभूतपूर्व संप्रेषण-साधनों के मध्य रहते हुए भी भीतर से पहले से अधिक अकेला है। इसी सामूहिक एकांत की पृष्ठभूमि में दो जीव एक शिशु मकैक पंच और एक तथाकथित निहिलिस्टिक पेंगुइन डिजिटल जगत के प्रतीक बनकर उभरे। एक को उसकी ही माता ने अस्वीकार किया, दूसरे ने मानो अपने एकांत को स्वयं वरण किया। परंतु दोनों की कथाओं में एक गहन सूत्र-साम्यता है अकेलापन, और उस अकेलेपन में अर्थ की खोज। पंच : परित्यक्त शिशु का मौन प्रतिरोध Ichikawa City Zoo में जन्मा पंच (पंच-कुन) एक शिशु मकैक है, जिसे…

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हिन्दी सिनेमा के आकाश पर यदि किसी नक्षत्र ने अपनी ज्योति से दर्शकों के अंतःकरण को एक साथ आलोकित और आर्द्र किया है, तो वह मधुबाला हैं। एक ऐसा नाम, जो उच्चरित होते ही केवल सौंदर्य की प्रतिमा नहीं, बल्कि करुणा, अव्यक्त वेदना और अनाम त्याग की गूंज बनकर हृदय में उतरता है। वह मात्र अभिनेत्री नहीं थीं, वह भारतीय जन-मन के स्वप्नलोक की वह छवि थी, जिसमें मुस्कान के अधरों पर अनश्वर विषाद का कंपन निरंतर थिरकता रहा। मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी से मधुबाला बनने की यात्रा, दरअसल एक बालिका के कंधों पर समय की निर्दय व्यवस्था का बोझ…

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कभी-कभी लगता है कि देश लोकतंत्र नहीं, एक डरपोक आत्मा की आत्मकथा में तब्दील हो चुका है। सत्ता की गद्दी पर बैठा व्यक्ति जनता से नहीं, सवालों से डरता है। वह प्रधानमंत्री कम, एक टेलीप्रॉम्प्टर-योगी ज्यादा लगता है जो तब तक बोलेगा जब तक सामने भीड़ हो, कैमरा चमक रहा हो, और कोई असुविधाजनक सवाल हवा में न मंडरा रहा हो। लेकिन जैसे ही देश में कोई संकट आता है तो ऑक्सीजन की कमी हो या लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ, अर्थव्यवस्था की टांग टूटे या किसानों की हड्डियाँ वैसे ही ये “56 इंच” सिकुड़कर 5.6 इंच रह जाता…

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भूमिका ईरान, जिसे प्राचीन काल में ‘फ़ारस’ (Persia) के नाम से जाना जाता था, पश्चिमी एशिया का एक प्रमुख राष्ट्र है। इसकी ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक महत्ता इसे मध्य-पूर्व (Middle East) की राजनीति का एक केंद्रीय स्तंभ बनाती है। फारस साम्राज्य से लेकर आधुनिक इस्लामी गणराज्य तक की यात्रा में ईरान ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं—आंतरिक सुधारों से लेकर बाहरी संघर्षों तक। इस ब्लॉग में हम न केवल ईरान के नाम-परिवर्तन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझेंगे, बल्कि समकालीन समय में खाड़ी देशों (Gulf Countries) के साथ इसके जटिल रिश्तों पर भी गहराई से दृष्टिपात करेंगे। ईरान या फारस: नाम…

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