Yogita Thakre Case: महाराष्ट्र के नागपुर में साल 2009 में सात वर्षीय योगिता ठाकरे की मौत का मामला आज भी चर्चा में बना हुआ है। इस मामले में जांच एजेंसियों का निष्कर्ष और पीड़ित परिवार के आरोप अलग-अलग रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले में अब तक क्या-क्या सामने आया।
19 मई 2009 को क्या हुआ था?
19 मई 2009 को नागपुर में सात वर्षीय योगिता ठाकरे की मौत एक सफेद Honda CR-V कार के अंदर हो गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
योगिता के परिवार का क्या संबंध था?
योगिता की मां उस समय महाराष्ट्र भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष Nitin Gadkari के घर में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती थीं। बताया जाता है कि काम के दौरान उन्होंने योगिता को वहीं छोड़ दिया था।
मौत कैसे हुई?
परिवार को बताया गया कि योगिता कार के अंदर सो गई थी। बाद में जब कार खोली गई तो वह बेहोश मिली। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
CID की जांच में क्या सामने आया?
मामले की जांच महाराष्ट्र CID ने की। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला कि यह एक दुर्घटनावश हुई मौत (Accidental Death) थी। CID के अनुसार, योगिता खेलते-खेलते कार के अंदर चली गई थी। कार का ऑटोमैटिक लॉक लग जाने के कारण वह बाहर नहीं निकल सकी और दम घुटने (Suffocation) से उसकी मौत हो गई।
परिवार ने क्या आरोप लगाए?
योगिता के परिवार ने CID की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। परिवार का कहना था कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह किसी गंभीर अपराध का मामला हो सकता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर क्या सवाल उठे?
रिपोर्टों के अनुसार, पोस्टमार्टम में योगिता के शरीर पर कुछ चोटों के निशान होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा अंडरगारमेंट्स पर खून के धब्बे मिलने का भी उल्लेख किया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर परिवार ने कहा कि मामले की दोबारा और गहराई से जांच होनी चाहिए।
अदालत में क्या हुआ?
CID ने इस मामले में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। हालांकि स्थानीय अदालत ने दोनों बार क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की और जांच से जुड़े कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए।
परिवार ने दबाव के क्या आरोप लगाए?
योगिता के परिवार का आरोप था कि उन पर केस वापस लेने का दबाव बनाया गया और उन्हें पैसे देने की पेशकश भी की गई। हालांकि जिन लोगों पर ये आरोप लगाए गए, उन्होंने इन्हें पूरी तरह खारिज किया।
नितिन गडकरी का क्या पक्ष रहा?
नितिन गडकरी और उनके परिवार ने शुरू से ही इस मामले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया। जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ कोई आपराधिक सबूत नहीं मिला और उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी गई।
CBI जांच की मांग क्यों हुई?
CID की जांच से असंतुष्ट योगिता के परिवार ने मामले की CBI जांच कराने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग खारिज कर दी और कहा कि इस मामले को देखने के लिए स्थानीय अदालतें अधिक उपयुक्त हैं।
न्याय की मांग जारी रही
योगिता के परिवार ने न्याय की मांग जारी रखी। साल 2017 में योगिता की बहन किरण ने स्थानीय चुनाव भी लड़ा और इस मामले को लेकर न्याय की मांग को सार्वजनिक रूप से उठाती रहीं।
आज भी चर्चा में क्यों है मामला?
योगिता ठाकरे केस आज भी इसलिए चर्चा में रहता है क्योंकि एक तरफ जांच एजेंसियों ने इसे दुर्घटनावश हुई मौत माना, जबकि दूसरी तरफ परिवार ने जांच पर लगातार सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसी वजह से यह मामला वर्षों बाद भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।



