रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच यूरोप के कई देशों ने अपनी इमरजेंसी और राष्ट्रीय सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी हैं। ब्रिटेन में लोगों को घर में जरूरी सामान रखने की सलाह दी जा रही है, फ्रांस का स्वास्थ्य तंत्र बड़े पैमाने पर घायल सैनिकों के इलाज की तैयारी कर रहा है और नीदरलैंड्स 72 घंटे तक की आपातकालीन जरूरतों के लिए लोगों को तैयार रहने को कह रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहा यह दावा कि “पिछले 24 घंटे में लगभग पूरे यूरोप ने रूस के खिलाफ वॉर अलर्ट घोषित कर दिया”, सही तस्वीर नहीं दिखाता।
पूरे यूरोप में कोई सामूहिक ‘वॉर अलर्ट’ नहीं
अभी तक यूरोप की ओर से ऐसी कोई समन्वित घोषणा नहीं हुई है कि रूस के साथ तत्काल युद्ध होने वाला है या सभी देशों को युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया है।
इसके बजाय अलग-अलग यूरोपीय देशों ने संकट की स्थिति में नागरिकों, सरकारी एजेंसियों और जरूरी सेवाओं की तैयारी बढ़ाने के कदम उठाए हैं। इनमें युद्ध के अलावा साइबर हमले, प्राकृतिक आपदा, बिजली-पानी की सप्लाई बाधित होना और दूसरे बड़े संकट भी शामिल हैं।
यानी मौजूदा घटनाक्रम को “युद्ध शुरू होने वाला है” की घोषणा के बजाय सिविलियन और राष्ट्रीय रेजिलिएंस बढ़ाने की तैयारी के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
ब्रिटेन में घरों को जरूरी सामान रखने की सलाह
ब्रिटेन ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर अपनी तैयारियां तेज की हैं। सरकार इस साल एक राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें लोगों को आपात स्थिति के दौरान कुछ समय तक खुद को संभालने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जाएगी।
रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें घर में बोतलबंद पानी, टिन वाला खाना और दूसरी जरूरी चीजें रखने जैसी सलाह शामिल होगी। इसका दायरा सिर्फ सैन्य खतरे तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर मौसम, साइबर हमलों और जरूरी सेवाओं में लंबे व्यवधान जैसी परिस्थितियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
ब्रिटेन 2027 में अपनी अब तक की सबसे बड़ी होम-डिफेंस एक्सरसाइज में से एक आयोजित करने की तैयारी भी कर रहा है। इसमें सरकार के सैकड़ों अधिकारी और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल होंगे। इसका उद्देश्य युद्ध या बड़े हाइब्रिड हमले जैसी परिस्थितियों में सरकारी तैयारियों को परखना है।
फ्रांस में अस्पतालों को बड़े पैमाने पर घायल सैनिकों के लिए तैयार किया जा रहा
फ्रांस में भी स्वास्थ्य व्यवस्था को संभावित बड़े सैन्य संकट के लिए तैयार किया जा रहा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसका सैन्य स्वास्थ्य तंत्र ऐसे हालात के लिए तैयारी कर रहा है जिन्हें वहां “major engagement” यानी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति कहा जाता है।
इसके तहत अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है जिससे जरूरत पड़ने पर बड़ी संख्या में युद्ध में घायल सैनिकों का इलाज किया जा सके। फ्रांस के स्वास्थ्य और रक्षा ढांचे में नागरिक स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका को भी इस तैयारी में शामिल किया गया है।
फ्रांसीसी अधिकारियों की ओर से इसे तत्काल युद्ध की घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया गया है। यह मुख्य रूप से contingency planning, यानी संभावित गंभीर परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी का हिस्सा है।
नीदरलैंड्स में 72 घंटे की तैयारी
नीदरलैंड्स सरकार भी लोगों को कम से कम 72 घंटे की आपातकालीन जरूरतों के लिए तैयार रहने को कह रही है।
सरकारी सलाह में लोगों से पानी और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला खाना घर में रखने को कहा गया है। इसके साथ टॉर्च, रेडियो, पावर बैंक, प्राथमिक उपचार की सामग्री, नकद और जरूरी दस्तावेज जैसी चीजें रखने की सलाह दी गई है।
हालांकि नीदरलैंड्स की यह तैयारी केवल रूस से संभावित युद्ध के लिए नहीं है। सरकार इसमें बिजली-पानी की सप्लाई बंद होने, साइबर हमले, प्राकृतिक आपदा और दूसरी आपात स्थितियों को भी शामिल करती है।
रूस को लेकर यूरोप की चिंता क्यों बढ़ी?
इन तैयारियों के पीछे सिर्फ आशंका नहीं, बल्कि पिछले कुछ महीनों में यूरोप में सामने आए कई सुरक्षा घटनाक्रम भी हैं।
जर्मनी ने सितंबर की शुरुआत में लीपजिग/हाले एयरपोर्ट पर अगस्त में मिले विस्फोटक से लैस ड्रोन के मामले में रूस को जिम्मेदार ठहराया था। जर्मन अधिकारियों के अनुसार, जांच में ऐसे संकेत मिले जो रूसी संलिप्तता की ओर इशारा करते थे। रूस ने इन आरोपों से इनकार किया और उन्हें बेबुनियाद बताया।
जर्मनी ने इस मामले के बाद रूसी संस्थानों और राजनयिकों के खिलाफ कई कदम उठाने की घोषणा भी की। हालांकि, बर्लिन ने उस समय NATO के अनुच्छेद 4 को लागू नहीं किया था।
यूरोप में ड्रोन और ‘हाइब्रिड वॉर’ की चिंता
लीपजिग की घटना अकेली नहीं है। यूरोपीय देशों में ड्रोन घुसपैठ, साइबर हमलों, तोड़फोड़ और दूसरे कथित हाइब्रिड ऑपरेशनों को लेकर चिंता बढ़ी है।
हाल के दिनों में NATO क्षेत्र में ड्रोन से जुड़े कई घटनाक्रम सामने आए हैं। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने भी ड्रोन घटनाओं, तोड़फोड़ और साइबर हमलों से निपटने के लिए यूरोपीय स्तर पर बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी रूस से जुड़े कथित हाइब्रिड खतरों को लेकर यूरोप की सुरक्षा तैयारियां मजबूत करने की बात कही है। मैक्रों ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को ड्रोन और साइबर हमलों से बचाने के लिए नई योजना बनाने का निर्देश दिया है।
तो क्या यूरोप रूस के साथ युद्ध की तैयारी कर रहा है?
यूरोप के कई देश निश्चित रूप से बड़े सुरक्षा संकट के लिए अपनी तैयारी बढ़ा रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी यूरोपीय देश रूस के साथ तत्काल युद्ध की घोषणा कर चुके हैं।
ब्रिटेन की होम-डिफेंस एक्सरसाइज, फ्रांस की सैन्य स्वास्थ्य तैयारियां और नीदरलैंड्स की 72 घंटे की आपातकालीन किट—इन सभी का उद्देश्य अलग-अलग संभावित संकटों में देश और नागरिकों की क्षमता बढ़ाना है।
हां, रूस से जुड़े कथित ड्रोन हमलों, साइबर हमलों और हाइब्रिड गतिविधियों के कारण यूरोप की सुरक्षा नीति में बदलाव जरूर दिखाई दे रहा है। ब्रिटेन ने अपनी तैयारियों में रूस जैसे बाहरी खतरों के साथ-साथ साइबर और अन्य गैर-पारंपरिक खतरों को भी शामिल किया है।
वायरल दावे और वास्तविक स्थिति में फर्क
इस पूरे घटनाक्रम को समझने का सबसे अहम बिंदु यही है कि “यूरोप में युद्ध की तैयारी बढ़ रही है” और “यूरोप ने रूस के खिलाफ युद्ध का अलर्ट जारी कर दिया है”—ये दोनों एक ही बात नहीं हैं।
पहली बात के पीछे कई देशों के आधिकारिक तैयारी कार्यक्रम और सुरक्षा घटनाएं मौजूद हैं। लेकिन दूसरी बात के लिए पूरे यूरोप की ओर से किसी सामूहिक युद्ध घोषणा का प्रमाण नहीं है।
फिलहाल तस्वीर यह है कि रूस के साथ बढ़ते तनाव और यूरोप में सामने आ रही सुरक्षा घटनाओं के बीच कई सरकारें अपने नागरिकों, अस्पतालों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सरकारी संस्थानों को बड़े संकट के लिए तैयार कर रही हैं। इसे तत्काल युद्ध की घोषणा से ज्यादा बढ़ती सुरक्षा चिंता और राष्ट्रीय रेजिलिएंस की तैयारी के रूप में समझना ज्यादा सटीक है।


