नई दिल्ली: ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच खाड़ी में जारी तनाव बढ़ता जा रहा है और इसका असर सीधे भारतीय नागरिकों और व्यापारिक मार्गों पर पड़ रहा है। मंगलवार (3 मार्च) को भारत ने इस संकट पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और क्षेत्रीय अस्थिरता गंभीर है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या यूएई (34–35 लाख), सऊदी अरब (25–30 लाख), कुवैत (10 लाख से अधिक), कतर और ओमान (7 लाख से अधिक) और बहरीन (3 लाख) में हैं। अधिकांश लोग निर्माण, स्वास्थ्य, खुदरा और सेवा क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
भारतीय मिशनों ने फंसे लोगों को सुरक्षित रहने और दूतावासों में पंजीकरण कराने की सलाह दी है। उड़ानों के रद्द होने और सीमाओं की बंदी के कारण सहायता के लिए हेल्पलाइन चालू की गई है। सीमित संख्या में भारतीय नागरिकों की हाल में वापसी भी शुरू हुई है।
व्यापारी जहाज और ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा
भारत ने कहा कि हाल के हमलों में कुछ भारतीय नागरिकों की मौत हुई या वे लापता हैं। इसके साथ ही व्यापारिक जहाजों पर हमले और हॉर्मुज स्ट्रेट में बाधा, भारतीय तेल और गैस आपूर्ति के लिए चिंता का कारण हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85–90 प्रतिशत मांग आयात पर निर्भर करता है, और इसमें से एक-तिहाई से अधिक तेल होर्मुज स्ट्रेट से आता है। एलएनजी आयात का लगभग आधा हिस्सा भी इसी मार्ग पर निर्भर है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश के ईंधन भंडार पर्याप्त हैं और अल्पकालिक व्यवधानों का सामना करने में सक्षम हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ ऊर्जा स्रोत ऐसे हैं जो होर्मुज मार्ग से गुजरते नहीं और आपूर्ति के वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध हैं।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, और यदि मार्ग बाधित रहता है तो कीमतें 90–100 डॉलर तक जा सकती हैं। इससे भारत की आयात लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
कूटनीतिक सक्रियता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान, कुवैत और कतर के नेताओं से फोन पर बातचीत की। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता मुख्य चर्चा का विषय रहा। मोदी ने ईरान का नाम लिए बिना हमलों की निंदा की।
सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, जॉर्डन और इज़राइल के नेताओं से भी बातचीत हुई, लेकिन ईरानी अधिकारियों के साथ कोई सार्वजनिक संवाद की सूचना नहीं मिली। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि चाबहार परियोजना और क्षेत्रीय सहयोग के कारण ईरान के साथ संबंध ऐतिहासिक हैं।
प्रशासनिक तैयारी
केंद्र सरकार ने आपूर्ति शृंखला बनाए रखने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है। इसमें वित्त, पेट्रोलियम, विदेश, नौवहन मंत्रालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर रखेगा और राष्ट्रीय हित के अनुसार निर्णय लेगा।

