पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का आज, शनिवार 28 दिसंबर 2024 को, दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। सिख धर्म के अनुसार, अंतिम संस्कार जीवन के अंत का नहीं, बल्कि आत्मा के परमात्मा में विलीन होने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक पहलुओं को शामिल किया जाता है। आइए सिख धर्म के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया और उससे जुड़ी मान्यताओं को विस्तार से समझते हैं।
सिख धर्म में महिलाओं की भागीदारी
सिख धर्म की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहां महिलाओं को अंतिम संस्कार में सक्रिय रूप से भाग लेने की अनुमति होती है। जबकि हिंदू धर्म में महिलाओं का श्मशान घाट में प्रवेश सीमित है, सिख धर्म में महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। वे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती हैं और मृतक को अंतिम विदाई दे सकती हैं।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया: मुख्य चरण
1. मृत्यु के बाद की तैयारी
- जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तो उसके शरीर को स्नान कराया जाता है।
- मृतक को सिख धर्म की पांच प्रमुख वस्तुएं—कंघा, कटार, कड़ा, कृपाण और केश—के साथ सजाया जाता है।
- शव को सफेद वस्त्र में लपेटा जाता है, जो पवित्रता और सादगी का प्रतीक है।
2. वाहेगुरु का जाप और अर्थी यात्रा
- परिवार, रिश्तेदार और करीबी लोग “वाहेगुरु” का जाप करते हुए अर्थी को श्मशान घाट तक ले जाते हैं।
- यह जाप आत्मा की शांति और परमात्मा से मिलन के लिए किया जाता है।
3. मुखाग्नि और शवदाह (दाह संस्कार)
- सिख धर्म में शव को जलाया जाता है, जिसे चिता पर रखा जाता है।
- परिवार का कोई करीबी सदस्य या सबसे बड़ा पुरुष मुखाग्नि देता है। यह कर्तव्य परिवार के प्रति उसके प्रेम और जिम्मेदारी को दर्शाता है।
4. चिता जलाने के बाद की प्रक्रिया
- चिता जलने के बाद अगले दिन श्मशान घाट पर फूल चुनने की रस्म होती है।
- चुने गए फूलों को किसी पवित्र नदी या जलाशय में प्रवाहित किया जाता है।
विशेष धार्मिक अनुष्ठान और अरदास
1. स्नान और भजन-कीर्तन
- श्मशान से लौटने के बाद सभी श्रद्धालु सबसे पहले स्नान करते हैं।
- शाम के समय भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जिसमें मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।
2. गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ
- सिख धर्म में मृत्यु के बाद 10 दिनों तक गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है।
- यह पाठ पूरे परिवार और समुदाय के बीच होता है और मृतक को परमात्मा के चरणों में शांति प्रदान करने का माध्यम माना जाता है।
3. कड़हा प्रसाद का वितरण और भोग
- गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ की समाप्ति पर कड़हा प्रसाद का वितरण किया जाता है।
- इसके बाद भजन-कीर्तन और अंतिम अरदास की जाती है, जिसमें सभी श्रद्धालु शामिल होते हैं।
सिख धर्म के अंतिम संस्कार का संदेश
सिख धर्म में अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह जीवन के गहरे अर्थ और आत्मा की यात्रा को दर्शाने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा है।
- समानता का प्रतीक: महिलाओं और पुरुषों दोनों को अंतिम संस्कार में समान रूप से भाग लेने का अधिकार है।
- सेवा और सामूहिकता: अंतिम संस्कार के दौरान किए जाने वाले भजन-कीर्तन और लंगर यह सिखाते हैं कि जीवन का उद्देश्य सेवा और सामूहिकता है।
- प्रकृति के प्रति सम्मान: पंचतत्व में विलीन होने की प्रक्रिया प्रकृति के प्रति आदर को दर्शाती है।
मनमोहन सिंह का अंतिम विदाई का क्षण
मनमोहन सिंह का व्यक्तित्व उनकी सादगी और सेवा भावना के लिए जाना जाता था। उनका अंतिम संस्कार भी सिख धर्म के सिद्धांतों के अनुरूप किया गया। परिवार के सदस्यों और प्रियजनों ने “वाहेगुरु” का जाप करते हुए उन्हें अंतिम विदाई दी।
निष्कर्ष
सिख धर्म में अंतिम संस्कार आत्मा के परमात्मा में विलीन होने की प्रक्रिया है। यह धर्म हमें जीवन और मृत्यु दोनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश देता है। मनमोहन सिंह जैसे महान नेता की अंतिम विदाई ने यह सिखाया कि विनम्रता और सेवा के साथ जिया गया जीवन ही सच्ची पूंजी है।



