नई दिल्ली: संसद के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है। हाल के उपचुनावों और सहयोगी दलों की स्थिति के बाद एनडीए की ताकत बढ़ी है, लेकिन अभी भी उसके सामने दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की चुनौती बनी हुई है।
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत कितना होता है?
लोकसभा में कुल 543 निर्वाचित सीटें हैं। किसी भी गठबंधन या पार्टी को दो-तिहाई बहुमत के लिए कम से कम 362 सांसदों का समर्थन चाहिए। यह संख्या संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए अहम मानी जाती है।
अभी NDA के पास कितनी सीटें हैं?
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और उपचुनावों के बाद NDA के पास लगभग 337 सांसदों का समर्थन है। यानी गठबंधन अभी भी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से करीब 25 सीटें दूर है।
हालांकि, यह संख्या समय-समय पर उपचुनाव, सहयोगी दलों के समर्थन और अन्य राजनीतिक बदलावों के कारण बदल सकती है।
दो-तिहाई बहुमत क्यों है महत्वपूर्ण?
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत मिलने से सरकार को संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में बड़ी ताकत मिलती है। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में भी आवश्यक समर्थन और कुछ मामलों में राज्यों की मंजूरी की जरूरत होती है।
क्या सिर्फ लोकसभा का बहुमत काफी है?
नहीं। संविधान संशोधन के कई मामलों में लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी विशेष बहुमत जरूरी होता है। इसके अलावा संघीय ढांचे से जुड़े कुछ संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से भी मंजूरी लेनी पड़ती है।
आगे क्या बदल सकता है?
आने वाले समय में यदि उपचुनाव होते हैं, नए सहयोगी दल एनडीए के साथ आते हैं या राजनीतिक समीकरण बदलते हैं, तो लोकसभा में एनडीए की संख्या बढ़ या घट सकती है। फिलहाल गठबंधन बहुमत में है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य अभी भी उसके लिए चुनौती बना हुआ है।



