भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इसकी वजह संयुक्त राष्ट्र (UN) की उस जांच रिपोर्ट को माना जा रहा है, जिसमें गाजा युद्ध के दौरान बच्चों के खिलाफ कथित हिंसा और अंतरराष्ट्रीय कानून के संभावित उल्लंघनों की जांच की गई है। जस्टिस मुरलीधर इस स्वतंत्र जांच आयोग के अध्यक्ष हैं।
कौन हैं जस्टिस एस. मुरलीधर?
जस्टिस एस. मुरलीधर का पूरा नाम श्रीनिवासन मुरलीधर है। वह भारत के वरिष्ठ न्यायविद रहे हैं और दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश रहने के बाद ओडिशा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रहे। अपने न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने मानवाधिकार, संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले दिए।
संयुक्त राष्ट्र में निभा रहे हैं अहम जिम्मेदारी
जस्टिस मुरलीधर वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग (Independent International Commission of Inquiry) के अध्यक्ष हैं। यह आयोग इजरायल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून तथा मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों की जांच करता है और अपनी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के समक्ष प्रस्तुत करता है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
हालिया रिपोर्ट में आयोग ने गाजा में बच्चों पर हुए हमलों और युद्ध के दौरान कथित गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों से जुड़े निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं। आयोग का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसने अपनी रिपोर्ट तैयार की है। वहीं इजरायल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग की रिपोर्टें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अहम मानी जाती हैं। हालांकि ये रिपोर्टें किसी देश या व्यक्ति को स्वतः दोषी घोषित नहीं करतीं, लेकिन भविष्य में होने वाली कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रियाओं में इनका संदर्भ लिया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों खास हैं जस्टिस मुरलीधर?
जस्टिस एस. मुरलीधर उन भारतीय न्यायाधीशों में गिने जाते हैं जिन्होंने देश की न्यायपालिका में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर उनकी जिम्मेदारी और हालिया रिपोर्ट के कारण उनका नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में है।



