नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सोशल मीडिया, एल्गोरिद्म और अदालतों की कार्यप्रणाली पर अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिद्म लोगों की सोच और राय को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर जताई चिंता
जस्टिस बागची ने कहा कि सोशल मीडिया ने लोगों तक जानकारी पहुंचाना आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि एल्गोरिद्म यह तय करते हैं कि लोगों को कौन-सी जानकारी ज्यादा दिखाई जाएगी, जिससे उनकी सोच प्रभावित हो सकती है।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में नागरिकों को अलग-अलग दृष्टिकोणों तक पहुंच मिलनी चाहिए, न कि केवल वही सामग्री दिखाई जाए जिसे एल्गोरिद्म प्राथमिकता दे।
कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रखी राय
जस्टिस बागची ने अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग को पारदर्शिता की दिशा में एक अच्छा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे आम लोग अदालत की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग का उपयोग जिम्मेदारी से होना चाहिए, ताकि अदालत की कार्यवाही का गलत अर्थ न निकाला जाए या उसे संदर्भ से हटाकर पेश न किया जाए।
एल्गोरिद्म पर बढ़ती निर्भरता चिंता का विषय
जस्टिस बागची ने कहा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिद्म यह तय करते हैं कि कौन-सी खबर, वीडियो या पोस्ट ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। ऐसे में यह जरूरी है कि तकनीक का इस्तेमाल पारदर्शी और जिम्मेदारी के साथ किया जाए।
उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य लोगों को जानकारी देना होना चाहिए, न कि उनकी राय को एकतरफा दिशा में ले जाना।
न्यायपालिका की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण
अपने संबोधन में जस्टिस बागची ने कहा कि अदालतों का काम केवल कानून के आधार पर फैसला देना है। न्यायपालिका को सोशल मीडिया के दबाव, ट्रेंड या जनमत से प्रभावित हुए बिना संविधान और कानून के अनुसार काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
डिजिटल दौर में संतुलन की जरूरत
जस्टिस बागची ने कहा कि तकनीक और सोशल मीडिया आधुनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनके उपयोग में संतुलन और जिम्मेदारी जरूरी है। उन्होंने पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।



