मुंबई/नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। खबरें हैं कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी है और वे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर शिंदे गुट में विलय की इच्छा जताई है। हालांकि, इस मामले की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कौन हैं बागी सांसद?
बताया जा रहा है कि बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल जैसे नाम शामिल हैं। हालांकि संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि वे उद्धव ठाकरे के साथ ही हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को “ऑपरेशन टाइगर” नाम दिया जा रहा है।
संजय राउत का तीखा हमला
शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बागी सांसदों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने विश्वासघात किया है।
बाद में विवाद बढ़ने पर राउत ने सफाई देते हुए कहा कि मराठी भाषा में ऐसे शब्द सामान्य बातचीत का हिस्सा होते हैं और उनकी भावनाओं को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
2022 के बाद शिवसेना में दूसरी बड़ी टूट
यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना में बड़ा राजनीतिक संकट आया हो। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर उद्धव ठाकरे सरकार गिरा दी थी।
उसके बाद चुनाव आयोग ने शिवसेना का नाम और चुनाव चिह्न धनुष-बाण शिंदे गुट को दे दिया था। अब सांसदों की संभावित बगावत ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
दल-बदल कानून में क्या है नियम?
लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है।
यानी 9 सांसदों में से 6 सांसद यदि एक साथ किसी अन्य दल में विलय का दावा करते हैं, तो उनका मामला कानूनी रूप से मजबूत माना जा सकता है।
इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत की खबर राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उद्धव ठाकरे ने बुलाई अहम बैठक
स्थिति को संभालने के लिए उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई है। पार्टी ने सभी सांसदों को बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
शिवसेना (UBT) ने चेतावनी दी है कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं होंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
भाजपा पर विपक्ष के आरोप
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर विपक्ष को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि विपक्षी दलों के सांसदों को भाजपा में शामिल कराने की कोशिश की जा रही है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उद्धव ठाकरे को खुद यह आत्ममंथन करना चाहिए कि उनके सांसद और विधायक पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं।
राउत का बड़ा आरोप
संजय राउत ने दावा किया कि बागी सांसदों को करोड़ों रुपये का लालच दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को चार्टर्ड विमानों से दिल्ली लाया गया और उन्हें आर्थिक प्रलोभन दिया गया।
हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?
अगर 6 सांसद वास्तव में शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका होगा। इससे महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत कमजोर हो सकती है और आने वाले चुनावों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और बागी सांसदों के अगले कदम पर टिकी हुई है।
निष्कर्ष
शिवसेना (UBT) में संभावित टूट ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से गरमा दिया है। 2022 के बाद यह उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा संकट माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक अटकल है या वास्तव में पार्टी के भीतर बड़ा बदलाव होने जा रहा है।



