महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के कई नेताओं के एकनाथ शिंदे के साथ आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। हाल ही में वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सचिन अहीर भी शिंदे गुट में शामिल हो गए, जिससे उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा झटका माना जा रहा है।
क्या है ऑपरेशन टाइगर?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, ऑपरेशन टाइगर का मकसद सिर्फ विपक्ष को कमजोर करना नहीं है। इसके पीछे दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं।
पहली वजह यह मानी जा रही है कि संसद में भविष्य में आने वाले बड़े संवैधानिक विधेयकों को पास कराने के लिए एनडीए को मजबूत संख्या की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सहयोगी दलों की ताकत बढ़ाना भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है।
क्या शिंदे अपना राजनीतिक कद बढ़ा रहे हैं?
विश्लेषकों का मानना है कि एकनाथ शिंदे अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी और देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बने, जबकि शिंदे को उपमुख्यमंत्री पद मिला।
अब माना जा रहा है कि शिंदे 2029 के चुनावों से पहले अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहते हैं ताकि भविष्य में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी और मजबूत हो सके।
क्या देवेंद्र फडणवीस हैं असली निशाने पर?
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि ऑपरेशन टाइगर का असली निशाना विपक्ष नहीं बल्कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हो सकते हैं।
कुछ राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि शिंदे का बढ़ता राजनीतिक प्रभाव भविष्य में भाजपा के अंदर शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसे राजनीतिक अटकलों के तौर पर देखा जा रहा है।
आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि यह अभियान उनकी पार्टी को कमजोर करने से ज्यादा भाजपा की अंदरूनी राजनीति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे “ऑपरेशन टाइगर” नहीं बल्कि “ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस” बताया और कहा कि यह 2029 की राजनीति को ध्यान में रखकर चलाया जा रहा है।
महायुति में भी उठ रहे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, महायुति गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी लगातार हो रहे दल-बदल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब राज्य में पहले से ही गठबंधन के पास मजबूत बहुमत है, तब और नेताओं को शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ रही है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर को लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह केवल विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति है या फिर महायुति के भीतर भी नए राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। 2029 के चुनावों को देखते हुए राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।



