लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण कोचिंग सेंटर अग्निकांड के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। मामले में चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और भवन मालिकों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
सोमवार को अलीगंज स्थित एक व्यावसायिक भवन में भीषण आग लग गई। इमारत में एक एनीमेशन और ट्रेनिंग सेंटर संचालित हो रहा था, जहां बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग अंदर फंस गए। जान बचाने के लिए कुछ छात्रों को इमारत से कूदना पड़ा। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं।
4 अधिकारी सस्पेंड
घटना के बाद सरकार ने जिम्मेदारी तय करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और निगरानी में गंभीर लापरवाही की आशंका जताई गई है।
4 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने भवन मालिक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में कई नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आग लगने की असली वजह क्या थी और सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।
SIT करेगी जांच
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने घटना पर दुख व्यक्त किया है।
पूरे प्रदेश में सुरक्षा जांच शुरू
लखनऊ हादसे के बाद उत्तर प्रदेश के कई शहरों में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई है। कानपुर में कई कोचिंग सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है, जहां अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हो रहा था।
निष्कर्ष
लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड ने एक बार फिर भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 लोगों की जान जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है, लेकिन यह हादसा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की बड़ी कीमत को भी उजागर करता है।



