भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक नई रिपोर्ट में चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve-SPR) में फिलहाल इतना कच्चा तेल मौजूद है, जो मौजूदा खपत के हिसाब से केवल 4.9 दिन तक की जरूरत पूरी कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक तनाव या तेल आपूर्ति में रुकावट की स्थिति में यह भंडार पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार क्या होता है?
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार वह आपातकालीन कच्चे तेल का भंडार होता है, जिसे सरकार किसी संकट या वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित रखती है। भारत में इन भंडारों का संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) करता है। मौजूदा भंडार विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पादुर में भूमिगत भंडारण केंद्रों में रखा गया है।
बढ़ती आयात निर्भरता भी चिंता का कारण
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, प्रतिबंध या समुद्री मार्गों में बाधा जैसी स्थिति बनती है, तो देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक तेल भंडार की क्षमता बढ़ाना समय की जरूरत है।
सरकार कर रही है क्षमता बढ़ाने की तैयारी
सरकार पहले से मौजूद रणनीतिक भंडारण क्षमता का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। भविष्य में नए भंडारण केंद्र विकसित किए जाने की योजना है, जिससे आपात स्थिति में देश के पास अधिक दिनों तक कच्चे तेल का सुरक्षित भंडार उपलब्ध रह सके।
क्यों महत्वपूर्ण है रणनीतिक तेल भंडार?
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे वैश्विक संकट, युद्ध या तेल आपूर्ति में अचानक आई रुकावट के दौरान ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए भारत को अपने रणनीतिक भंडार का और विस्तार करने की आवश्यकता है।



