नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को रूस ने यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशाडबैंक (Oschadbank) के साथ चल रहे एक बड़े निवेश विवाद में अपना मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह मामला रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बैंक की संपत्तियों को हुए नुकसान से जुड़े करोड़ों डॉलर के दावे से संबंधित है।
तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करेगा मामले की सुनवाई
इस विवाद को सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल बनाया गया है। कोस्टा रिका की मध्यस्थ और पूर्व व्यापार मंत्री डियाला जिमेनेज इसकी अध्यक्ष होंगी। उन्हें रूस और ओशाडबैंक ने आपसी सहमति से चुना है।
रूस की ओर से पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को नियुक्त किया गया है, जबकि ओशाडबैंक ने ग्रीस के मध्यस्थ और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रोफेसर स्टावरोस ब्रेकौलाकिस को अपना मध्यस्थ चुना है।
क्या है रूस और यूक्रेन के बैंक का विवाद?
यह मध्यस्थता प्रक्रिया रूस और यूक्रेन के बीच 1998 में हुई द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत शुरू हुई है। यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशाडबैंक का आरोप है कि 2022 में रूस के सैन्य हमले और उसके बाद की कार्रवाइयों के कारण उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
बैंक के मुताबिक, डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिजिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और कारोबार को नुकसान पहुंचा या उनका नियंत्रण छिन गया। बैंक ने इसी नुकसान के लिए रूस से मुआवजे की मांग की है।
ओशाडबैंक ने जुलाई 2025 में रूस को विवाद सुलझाने के लिए औपचारिक नोटिस भेजा था। रूस की ओर से जवाब नहीं मिलने के बाद बैंक ने मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की।
पहले रूस का ऑफर ठुकरा चुके थे चंद्रचूड़
खास बात यह है कि रूस ने इससे पहले भी डीवाई चंद्रचूड़ को कुछ अन्य संधि विवादों में मध्यस्थ बनने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने उन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने विंटर्सहॉल डीया और यूक्रेनर्गो से जुड़े मामलों में भी उन्हें अपना मध्यस्थ बनाने की पेशकश की थी। इससे पहले चंद्रचूड़ को एक अलग मामले में ‘नियुक्ति प्राधिकारी’ बनाया गया था, लेकिन रूस के प्रस्ताव की जानकारी सामने आने के बाद वह उस भूमिका से भी हट गए थे।
अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ के तौर पर नई भूमिका
डीवाई चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वह कई अंतरराष्ट्रीय और कानूनी मामलों में मध्यस्थता से जुड़ी भूमिकाएं निभा चुके हैं। 2025 में उन्हें रूस से जुड़े एक अन्य ऊर्जा विवाद में ‘appointing authority’ की भूमिका भी दी गई थी।
रूस और यूक्रेन से जुड़े इस नए मामले में अब तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल दोनों पक्षों की दलीलें और दावों पर विचार करेगा। इसका फैसला अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद की प्रक्रिया के तहत होगा।


