Padma Awards Rejected by Famous Indians: भारत रत्न और पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में गिने जाते हैं। इन पुरस्कारों को पाना हर व्यक्ति के लिए गर्व की बात होती है। लेकिन भारत के इतिहास में कई ऐसी महान हस्तियां भी रही हैं जिन्होंने इन सम्मानों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। किसी ने अपने सिद्धांतों के कारण पुरस्कार नहीं लिया, तो किसी ने सरकार से स्वतंत्र रहने की बात कही। वहीं कुछ लोगों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अपना सम्मान वापस भी लौटा दिया।
रोमिला थापर ने दो बार ठुकराया पद्म भूषण
देश की प्रसिद्ध इतिहासकार रोमिला थापर को 1992 और 2005 में पद्म भूषण देने की पेशकश की गई थी। लेकिन उन्होंने दोनों बार इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि वह केवल अकादमिक संस्थानों द्वारा दिए गए सम्मान स्वीकार करती हैं, सरकारी नागरिक सम्मान नहीं। उनका मानना था कि एक इतिहासकार की स्वतंत्रता सबसे महत्वपूर्ण होती है।
कृष्णा सोबती ने कहा- लेखक को सत्ता से दूरी रखनी चाहिए
हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका कृष्णा सोबती को वर्ष 2010 में पद्म भूषण देने की घोषणा हुई थी। उन्होंने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि एक लेखक को सरकार और सत्ता से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने साहित्य अकादमी फेलोशिप को अपने लिए पर्याप्त सम्मान बताया था।
बुद्धदेव भट्टाचार्य ने विचारधारा के कारण नहीं लिया सम्मान
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को 2022 में पद्म भूषण देने की घोषणा हुई थी। हालांकि उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनकी कम्युनिस्ट विचारधारा राज्य द्वारा दिए जाने वाले नागरिक सम्मान स्वीकार करने की अनुमति नहीं देती।
दत्तोपंत ठेंगड़ी ने भी लौटाया प्रस्ताव
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी को वर्ष 2000 में पद्म भूषण देने का फैसला किया गया था। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया कि जब तक कई अन्य योग्य लोगों को उचित सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक वह स्वयं यह सम्मान स्वीकार नहीं करेंगे।
खुशवंत सिंह ने विरोध में लौटाया पद्म भूषण
प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह ने 1974 में पद्म भूषण स्वीकार किया था। लेकिन 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में उन्होंने यह सम्मान सरकार को लौटा दिया। इसे उन्होंने अपना लोकतांत्रिक विरोध बताया था।
उस्ताद विलायत खान ने क्यों नहीं लिया पद्म पुरस्कार?
महान सितार वादक उस्ताद विलायत खान ने पद्म श्री और पद्म भूषण दोनों सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनका मानना था कि उनके संगीत का मूल्यांकन करने वाली समिति उनकी कला को सही तरीके से समझने की विशेषज्ञता नहीं रखती।
सितारा देवी ने कहा- यह सम्मान नहीं, अपमान है
कथक की प्रसिद्ध नृत्यांगना सितारा देवी को 2002 में पद्म भूषण देने की घोषणा की गई थी। उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा था कि उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें इससे बड़ा सम्मान मिलना चाहिए था।
संध्या मुखोपाध्याय ने भी नहीं लिया पद्म श्री
बंगाल की मशहूर गायिका संध्या मुखोपाध्याय ने 2022 में पद्म श्री स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। परिवार का कहना था कि संगीत जगत में उनके लंबे और महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें इससे बड़ा सम्मान मिलना चाहिए था।
सलीम खान ने भी ठुकराया पद्म श्री
फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर पटकथा लेखक सलीम खान को 2015 में पद्म श्री देने की घोषणा हुई थी। उन्होंने यह कहते हुए सम्मान लेने से इनकार कर दिया कि उनसे जूनियर कई लोगों को पहले ही बड़े सम्मान मिल चुके हैं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के भारत रत्न पर विवाद
1992 में सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा की थी। हालांकि उनके परिवार ने इस सम्मान को स्वीकार नहीं किया। परिवार का कहना था कि पहले नेताजी की मृत्यु से जुड़े सवालों का समाधान होना चाहिए। बाद में सरकार ने यह फैसला वापस ले लिया।
सम्मान से बड़ा हो सकता है सिद्धांत
इन सभी घटनाओं से यह साफ होता है कि कई महान हस्तियों ने पुरस्कारों का विरोध नहीं किया, बल्कि अपने व्यक्तिगत सिद्धांतों, विचारधारा, पेशेवर स्वतंत्रता या राजनीतिक विरोध को प्राथमिकता दी। यही कारण है कि उन्होंने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भी स्वीकार नहीं किया।



