नई दिल्ली: दुनिया की दिग्गज फार्मास्यूटिकल और हेल्थकेयर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) ने टैल्कम पाउडर और बेबी पाउडर से जुड़े हजारों मुकदमों को खत्म करने के लिए 5.5 अरब डॉलर (करीब 52,640 करोड़ रुपये) के समझौते का प्रस्ताव दिया है। कंपनी पर अमेरिका में लगभग 76 हजार मुकदमे चल रहे हैं। इन मामलों में महिलाओं का आरोप है कि कंपनी के टैल्क आधारित उत्पादों के इस्तेमाल से उन्हें ओवेरियन कैंसर (Ovarian Cancer) हुआ।
अगर यह समझौता मंजूर हो जाता है, तो यह अमेरिका में कंपनी के खिलाफ चल रहे सबसे बड़े और लंबे कानूनी विवादों में से एक का अंत हो सकता है।
क्या है कंपनी का प्रस्ताव?
जॉनसन एंड जॉनसन ने कहा है कि समझौते के तहत वह वर्ष 2027 में करीब 3 अरब डॉलर का भुगतान कर सकती है। बाकी राशि 2028 के बाद दी जाएगी।
हालांकि, यह समझौता तभी लागू होगा, जब कम से कम 95 प्रतिशत दावेदारों का प्रतिनिधित्व करने वाली कानून फर्में इस प्रस्ताव को स्वीकार करें। कंपनी का कहना है कि इससे पिछले 15 वर्षों से चल रहे विवाद को समाप्त करने का रास्ता साफ हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?
जॉनसन एंड जॉनसन पर कई वर्षों से आरोप लगते रहे हैं कि उसके टैल्क आधारित बेबी पाउडर और अन्य उत्पादों में एस्बेस्टस (Asbestos) मौजूद था। महिलाओं का दावा है कि लंबे समय तक इन उत्पादों का इस्तेमाल करने से उन्हें ओवेरियन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हुई।
हालांकि, कंपनी ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। J&J का कहना है कि उसके उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और वैज्ञानिक शोध इन आरोपों की पुष्टि नहीं करते।
वैज्ञानिकों की राय भी बंटी हुई
इस विवाद पर वैज्ञानिकों की भी एक जैसी राय नहीं है। कुछ अध्ययनों में टैल्क के इस्तेमाल और ओवेरियन कैंसर के बीच संभावित संबंध बताया गया है, जबकि कई अन्य शोधों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला।
इसी वजह से यह मामला वर्षों से अदालतों में चल रहा है।
बेबी पाउडर की बिक्री पहले ही बंद कर चुकी है कंपनी
जॉनसन एंड जॉनसन ने 2020 में अमेरिका और कनाडा में टैल्क आधारित बेबी पाउडर की बिक्री बंद कर दी थी। इसके बाद कंपनी ने 2023 में पूरी दुनिया में भी इस उत्पाद की बिक्री रोक दी और उसकी जगह कॉर्नस्टार्च आधारित बेबी पाउडर लॉन्च किया।
हालांकि, कंपनी ने उस समय भी कहा था कि यह फैसला सुरक्षा कारणों से नहीं, बल्कि अपने उत्पादों की श्रृंखला को सरल बनाने के लिए लिया गया था।
समझौते की राशि 7 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है
मामले से जुड़े वकील क्रिस सीगर ने कहा कि समझौते की कुल राशि अभी तय नहीं है। यदि बड़ी संख्या में दावेदार इस योजना में शामिल होते हैं, तो कंपनी का कुल भुगतान 7 अरब डॉलर से अधिक भी हो सकता है।
हालांकि, यह समझौता केवल मौजूदा मामलों पर लागू होगा। भविष्य में यदि कोई नया दावा सामने आता है, तो वह अलग से अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
अदालतों में मिला-जुला रहा कंपनी का रिकॉर्ड
जॉनसन एंड जॉनसन को कुछ मामलों में अदालतों ने भारी मुआवजा देने का आदेश दिया है, जबकि कई मामलों में कंपनी को राहत भी मिली है।
हाल ही में एक संघीय अदालत ने करीब 69 हजार मामलों में कहा था कि दावेदारों को यह साबित करने के लिए ठोस वैज्ञानिक सबूत देने होंगे कि उनके कैंसर का सीधा संबंध कंपनी के टैल्क उत्पादों से है।
इसके अलावा, पिछले साल लॉस एंजिल्स की एक ज्यूरी ने एस्बेस्टस से जुड़े कैंसर मेसोथेलियोमा से मौत के एक मामले में पीड़ित परिवार को 966 मिलियन डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था। कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है।
पहले भी अपनाई थी ‘टेक्सास टू-स्टेप’ रणनीति
इससे पहले जॉनसन एंड जॉनसन ने मुकदमों से निपटने के लिए ‘टेक्सास टू-स्टेप’ नाम की कानूनी रणनीति अपनाई थी। इसके तहत कंपनी ने एक अलग इकाई बनाकर उसे दिवालिया घोषित करने की कोशिश की, ताकि सभी मुकदमों का एक साथ निपटारा किया जा सके।
लेकिन अदालतों ने कंपनी की यह कोशिश तीन बार खारिज कर दी। इसके बाद मार्च 2025 से मुकदमों की सुनवाई फिर शुरू हो गई।
अब कंपनी ने नया समझौता प्रस्ताव पेश किया है। यदि 95 प्रतिशत दावेदार इसे स्वीकार कर लेते हैं, तो ओवेरियन कैंसर से जुड़े अधिकांश मामलों का निपटारा हो जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कंपनी को अमेरिका की अलग-अलग अदालतों में इन मुकदमों का सामना करना पड़ेगा।



