अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सवाल उठने लगे हैं। मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले चंपत राय अब विपक्ष, संत समाज और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने नेताओं के निशाने पर हैं।
हालांकि चंपत राय को लंबे समय से एक ईमानदार, सादगीपूर्ण और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले ने उनकी भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राम मंदिर निर्माण के प्रमुख चेहरा रहे हैं चंपत राय
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े चंपत राय ने दशकों तक राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। अयोध्या में लंबे समय तक काम करने के कारण उन्हें वहां के संत समाज, अखाड़ों और मठों की गहरी समझ रखने वाला व्यक्ति माना जाता है।
राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में चंपत राय सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल रहे। मंदिर निर्माण और ट्रस्ट से जुड़े अधिकांश बड़े फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
ट्रस्ट गठन के समय से ही था असंतोष
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद कई संतों और मंदिर आंदोलन से जुड़े नेताओं ने नाराजगी जताई थी। उनका आरोप था कि आंदोलन में वर्षों तक संघर्ष करने वाले कई प्रमुख लोगों को ट्रस्ट और मंदिर निर्माण प्रक्रिया से दूर रखा गया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास बनाए गए, लेकिन कई लोगों का मानना था कि वास्तविक निर्णय लेने की शक्ति चंपत राय के पास ही थी। इसी वजह से समय-समय पर संत समाज और ट्रस्ट के बीच मतभेद भी सामने आते रहे।
चढ़ावा चोरी मामले ने बढ़ाई मुश्किलें
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई संत, महंत और आंदोलन से जुड़े पुराने नेता अब खुलकर चंपत राय की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
पूर्व सांसद विनय कटियार, संतोष दुबे और छोटी छावनी के महंत कमल नयन दास जैसे कई नामों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कुछ नेताओं ने मामले की पूरी जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
ईमानदारी की छवि के बावजूद उठ रहे सवाल
चंपत राय की पहचान एक सादगीपूर्ण और निष्कलंक जीवन जीने वाले व्यक्ति के रूप में रही है। राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अधिकांश लोग उनके व्यक्तिगत जीवन को लेकर भ्रष्टाचार के आरोपों को स्वीकार नहीं करते।
फिर भी, क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट और मंदिर परिसर का संचालन लंबे समय से उनकी देखरेख में होता रहा है, इसलिए लोगों का मानना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी उनसे जुड़ती है।
नृपेंद्र मिश्र और योगी आदित्यनाथ का क्या कहना है?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर के कामकाज में कुछ गड़बड़ियों की बात स्वीकार की है, लेकिन साथ ही चंपत राय के व्यक्तिगत चरित्र को निष्कलंक बताया है।
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कहा कि किसी व्यक्ति का चरित्र हनन नहीं किया जाना चाहिए। राजनीतिक गलियारों में इसे चंपत राय के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
क्या ट्रस्ट में होगा बड़ा बदलाव?
चढ़ावा चोरी मामले के बाद ऐसी चर्चाएं तेज हो गई हैं कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जा सकता है। ट्रस्ट के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए पेशेवर प्रबंधन प्रणाली लागू किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
साथ ही यह भी चर्चा है कि भविष्य में चंपत राय और कुछ अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ट्रस्ट से दूरी बना सकते हैं।
SIT जांच पर टिकी हैं सबकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और क्या किसी बड़े पदाधिकारी को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के लिए कौन जिम्मेदार है और ट्रस्ट में आगे क्या बदलाव किए जाएंगे।
निष्कर्ष
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला केवल वित्तीय अनियमितता का मुद्दा नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बन गया है। ऐसे में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और ट्रस्ट की आगामी कार्रवाई पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।



