तेहरान/वॉशिंगटन/दिल्ली: मध्य पूर्व में पहले से चल रहे संघर्ष ने अब ऐसे मोड़ ले लिया है कि पूरी दुनिया की नज़रे एक बार फिर ईरान‑अमेरिका‑इज़राइल त्रिकोण पर टिक गई हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी इज़राइल की सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है, और शनिवार (7 मार्च 2026) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण का ultimatum देते हुए चेतावनी दी है कि आज रात बड़े पैमाने पर हमला किया जा सकता है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अगर ईरान सरकार सरेंडर नहीं करती है, तो संयुक्त अमेरिकी‑इज़राइली सेनाएं और भी तीव्र हमले कर सकती हैं, जिनमें अब तक निशाने पर न रहे इलाकों और अधिकारियों को भी टारगेट किया जा सकता है। उन्होंने यह चेतावनी अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर दी।
ट्रंप का अल्टीमेटम, और बढ़े निशाने
ट्रंप ने कहा है कि ईरान अब मध्य पूर्व का दबंग देश नहीं बल्कि हार की कगार पर है, और अगर उसने आत्मसमर्पण नहीं किया तो अमेरिका उसकी पूरी सैन्य, राजनैतिक और आर्थिक संरचना को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युद्ध के अगले चरण में ईरान के राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों को भी सीधे तौर पर टारगेट किया जाएगा, न कि सिर्फ सैनिक ढांचे को।
ट्रंप के बयान के बाद भले ही ईरान ने पुरी तरह आत्मसमर्पण से इनकार किया है, लेकिन उसने यह भी कहा है कि वह अपने सुप्रीम लीडर आयातुल्ला खामेनेई की मौत का बदला लेने तक युद्ध जारी रखेगा।
मिडिल ईस्ट में तनाव और तबाही
मध्य पूर्व में यह संघर्ष अब एक स्थानिक जंग से बढ़कर व्यापक युद्ध का रूप ले चुका है। इज़राइल और अमेरिका ने तेहरान और लेबनान में बड़े एयर स्ट्राइक किए हैं, और ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की है। युद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं, जबकि भारी नागरिक और सैन्य जान‑माल की क्षति हुई है।
कई खाड़ी देशों जैसे यूएई, क़तर, बहरीन और सऊदी अरब ने अपने नागरिकों के लिए अलर्ट जारी किए हैं, क्योंकि उन पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले की खबरें आई हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले की ख़बरें दहशत पैदा कर रही हैं।
अमेरिका की सैन्य रणनीति और आर्थिक प्रभाव
ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध में इज़राइल को भारी हथियार भेजने की मंज़ूरी दे दी है। इसके साथ ही, अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी को मध्य पूर्व में और भी मजबूत कर रहा है। युद्ध के इस चरण में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों और ईरानी जवाबी हमलों के बीच तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव देखा गया है।
अमेरिकियों में मतभेद, वैश्विक चिंताएँ
युद्ध के इस मोड़ पर अमेरिका के अंदर भी मतभेद उभर कर आए हैं। ताज़ा सर्वेक्षणों के अनुसार, अमेरिकी जनता का अधिकांश हिस्सा सैन्य कारवाई का विरोध कर रहा है और ट्रंप प्रशासन की नीति से असंतुष्ट है।
सामान्य लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं रह गया. वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति, और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी इसके दुष्प्रभाव बढ़ रहे हैं।
युद्ध की दिशा क्या होगी?
कई विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष अब प्रभावी बातचीत या शांति की ओर कम और युद्ध की तीव्रता की ओर अधिक बढ़ रहा है, क्योंकि दोनों पक्षों ने अभी तक कोई स्पष्ट बातचीत नहीं की है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि किसी भी तरह की डील तभी संभव होगी जब ईरान पूरी तरह से आत्मसमर्पण करे।
इस बीच दुनिया फिर एक बार एक बड़े युद्ध के कगार पर खड़ी है, जहाँ आज रात क्या होगा। वह न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि समूचे वैश्विक सुरक्षा के लिहाज़ से महत्वपूर्ण होगा।



