Browsing: Chandpur Ki Chanda

‘चाँदपुर की चंदा’ को लोकप्रियता और लोक-स्मृति के बने-बनाए घेरे से बाहर निकालकर उसके यथार्थपरक सामाजिक संदर्भों में देखने की कोशिश यह लेख करता है। रचना में उपस्थित स्मृतियों, ग्रामीण जीवन और बदलते सामाजिक यथार्थ के अंतर्विरोधों के माध्यम से चंदा के चरित्र और उसकी दुनिया का नए सिरे से मूल्यांकन किया गया है।