दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। दोनों नेताओं की जमानत और रिहाई की प्रक्रिया के बीच विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) को धमकी मिलने की शिकायत सामने आई है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि धमकी किसने दी और इसके पीछे कौन था।
मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने की शिकायत
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मंडी मार्ग स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने शिकायत दी थी कि उन्हें धमकी भरे संदेश मिले हैं। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
यह घटनाक्रम सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई से जुड़ी सुनवाई के दौरान सामने आया। हालांकि, धमकी भेजने वाले की पहचान को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
CJP ने रिहाई में देरी का लगाया आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया में लगातार देरी कर रही है। पार्टी का कहना है कि जमानत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनके द्वारा पेश किए गए जमानतदारों के दस्तावेज अलग-अलग आधार पर खारिज किए जा रहे हैं।
पार्टी की कानूनी टीम से जुड़ी रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने मामले के गुण-दोष पर विचार करने के बजाय धमकी मिलने की बात उठाई। पार्टी ने इसे रिहाई की प्रक्रिया को लंबा खींचने की कोशिश बताया है। ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।
पुलिस ने आरोपों से किया इनकार
दिल्ली पुलिस का कहना है कि रिहाई की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी नहीं की गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जमानत से जुड़े दस्तावेजों में कमियां होने के कारण उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सका। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने की शिकायत के बाद मामले की जांच जरूरी है।
इस तरह, जहां CJP ने प्रशासन पर दोनों नेताओं को हिरासत में रखने के लिए देरी करने का आरोप लगाया है, वहीं पुलिस ने प्रक्रिया के नियमों के अनुसार काम करने की बात कही है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता
सौरभ दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। पुलिस के मुताबिक, दोनों नेताओं और कुछ अन्य कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन स्थल के बंद गेट पार कर वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। जंतर-मंतर को उस समय अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया जा चुका था।
14 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। इसके बाद से उनकी रिहाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
फिलहाल मजिस्ट्रेट को धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि सौरभ दास और आशुतोष रांका की रिहाई को लेकर CJP और पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।


