ढाका: बांग्लादेश ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने की संभावना को लेकर अपना रुख साफ किया है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कहा है कि इस समझौते में शामिल होने से देश को किसी तरह का खतरा नहीं है। इस बयान के बाद एक बार फिर इस समझौते को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिसे कुछ लोग ‘इस्लामिक नाटो’ भी कह रहे हैं।
क्या है मक्का डिफेंस पैक्ट?
सऊदी अरब और पाकिस्तान ने सितंबर 2025 में स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है। इसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।
इस समझौते के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या दूसरे मुस्लिम देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। बांग्लादेश का नाम भी संभावित देशों में लिया जा रहा है।
बांग्लादेश को क्यों नहीं दिख रहा कोई खतरा?
बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन से जब पूछा गया कि अगर ढाका इस समझौते में शामिल होता है तो क्या इससे भारत या अमेरिका के साथ उसके रिश्तों पर असर पड़ सकता है, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई खतरा दिखाई नहीं देता।
उनके मुताबिक, किसी भी अंतरराष्ट्रीय रक्षा समझौते में शामिल होने से पहले बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय हितों और संभावित प्रभावों को ध्यान में रखकर फैसला करेगा।
कौन-कौन से देश जुड़ सकते हैं?
मक्का डिफेंस पैक्ट के विस्तार को लेकर तुर्की, मिस्र और बांग्लादेश जैसे देशों के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, किसी भी देश के शामिल होने को लेकर अंतिम फैसला संबंधित देशों की सरकारों पर निर्भर करेगा।
अगर इसमें कई मुस्लिम देश शामिल होते हैं तो यह पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
क्या इसे ‘इस्लामिक नाटो’ कहना सही है?
मक्का डिफेंस पैक्ट की तुलना कई जगह नाटो से की जा रही है, क्योंकि इसमें सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा को महत्व दिया गया है। लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर ‘इस्लामिक नाटो’ कहना सही नहीं होगा। दोनों संगठनों की संरचना, सदस्यता और कानूनी व्यवस्था अलग है।
फिलहाल इस समझौते का सबसे बड़ा असर सऊदी अरब और पाकिस्तान के रक्षा संबंधों पर दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश जैसे देशों के संभावित जुड़ाव से इसका दायरा और बढ़ सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
बांग्लादेश अगर इस तरह के किसी रक्षा समझौते का हिस्सा बनता है तो भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण होगा। भारत और बांग्लादेश के बीच भौगोलिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध हैं। ऐसे में ढाका की किसी नई सैन्य या रक्षा साझेदारी का असर क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
हालांकि, अभी बांग्लादेश की ओर से इस समझौते में शामिल होने का कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है।

